पुरूषाेत्तम सिग्देलकतै चित् कतै पाेट् बनिस् क्या इमान
लटाई र धागाे लिएकाे छ चङ्गा अरूकै गरी चेट् सुकाइस् इमान निसाफी छुराले नियाँकाे बहाना दुला नाेट झर्ने रचाइस् इमान ।
पुरूषाेत्तम सिग्देल
नियाँ खाेल ओढी लुकिस् क्या इमान
तिलस्मी कुरामा चुकिस् क्या इमान
बलात्कारिए न्यायका बन्ध धारा
जता मल्खु ढेरी झुकिस् क्या इमान
कताकाे कता पल्टिने हुन्छ पासा
कतै चित् कतै पाेट् बनिस् क्या इमान
घसेकाे छ श्रीखण्ड साधुबिरालाे
मुसा लामभित्रै छिनिस् क्या इमान
चढेकाे चुली मानसम्मान भारी
नजानी कि जानी उतारिस् इमान
चिनेकाे पन्यू डाडु बाेक्तै हिजाे नै
इसारा गरी घ्यू खन्याइस् इमान
लटाई र धागाे लिएकाे छ चङ्गा
अरूकै गरी चेट् सुकाइस् इमान
निसाफी छुराले नियाँकाे बहाना
दुला नाेट झर्ने रचाइस् इमान
भराेसा दिने मूल खम्बा अडेसा
उडाउन्न हावा रमाइस् इमान
कुटेझैँ गरूँला तँ राेए परेमा
सुराकी छँदैछन् कमाइस् इमान
लठ्याई दिने गुप्त छन् मन्त्र तन्त्र
फुकी फू* तिनै मुस्कुराइस् इमान
नियाँ पाेतिएकाे मुखुन्डे इमान
उठेमा युवा लात खाइस् इमान
सदा बाेध कर्तव्यकाे हाेस् इमान
छली बेइमानी नचालिस् इमान ।
०००
२०८३/६/१८ ।
काठमाडाैं
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest




































