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मान्छे (श्रृङ्खलाबद्ध कविता- १०३)

मान्छे (श्रृङ्खलाबद्ध कविता- १०३)

के.पी. पौडेल : चलेछ उग्र काण्डको, विशेष नाट्य ताण्डव । इमान धर्म बेचियो, विकार बोक्छ मानव

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