साइबर अपराध सम्बन्धी सचेतना सामग्री

ह्याप्पी कोरोना डे

राहत सामग्री के नाम पर के घोब्लाबाजी करेला हमनी के सब पता बा । अरे रौंवा तुम लोगन् इस सब में ना रहेला वो हम बनिया से जानतनि । (रूँदै) ऐसन बात अगर दोबारा करबे ना ति डुङ्ग्र लोगन के ऐसा झाँपट मारम् कि कनपट्टी लाल होइ ।

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कृष्ण प्रधान :

पात्रहरू – पतरकी, जोगिन्द, विन्देश्वर

दृश्य विवरण -समय साँझ । रेल स्टेशनको पछिल्तिर भट्टी पसल थापेर जीवन निर्वाह गर्ने पतरकी दिदीलाई महानगरीमा दिनभर रिक्सा तान्ने दुइ रिक्सावाला जोगिन्दर, विन्देश्वरले पनि भट्टी पसलमा रम-रक्सी ओसारेर सघाउँन काम गर्दछन् । लकडाउनको समयमा रम दोकान खोलिएको दिन साँझमा सानो पार्टी गर्ने उद्देश्यमा पतरकी दिदीलाई निम्त्याएको हुनाले पतरकी उनीहरूको डेरामा आइपुग्छे ।े

पतरकी – (नेपथ्यबाट) जोगिन्दर…ए विन्देश्वर ।
विन्देश्वर – (नेपथ्यतिर हेर्दै) पतरकी दि आनु भितर में आनु । (मञ्चतिर हेर्दै) ए जोगिन्दर पतरकी दि आएल् बाटे ।
जोगिन्दर – बोलाव भितरे । (पतरकीको प्रवेश । कोरोनाको नक्सा र एक बोतल रममा फूलको माला पहिराएको देखेर छक्क पर्छे । )
पतरकी – आम्बो… का हँ यी सब ?
दुवै – दारुदेवी, कोरोना माई र बोतल बाबालाई माला लगा देनी हँ ।
पतरकी – हँ… बोतलमा माला साला डिङ्गरहरू । किन यस्तो ?
विन्देश्वर – (भावुकतामा आएर) हेर्नु पतरकि दि यी बतायी कितना दिन बाद में दारु पियेको मिलल् बा । यही कारण कोरोना माई के दारुमाता समझ के ‘ह्याप्पी कोरोना डे’ मनावे खातिर तोराके बोलावल् गइल् बाटे ।
पतरकी – मारेछ । शाला डिङ्गरहरू । रौँवा लोगन् का और काम नैखे मिलल् बा । यही कारण से कोरोना माई के दारूमाता समझ के ‘ह्याप्पी कोरोना डे’ मनावे खातिर तोराको बोलावल् गइल् बाटे ।
जोगिन्दर – (थालमा बोतल र गिलास लिएर) पतरकिदि पहिले गिलासे में डालकर कोरोना माई के चढ़ा दियी ओकेरा बाद हमनी के सब पियल जाई और मनोरञ्जन करेके हँ ।
दुवै – हँ पिय पिय कोई बात नैखे । कोरोना माई के प्रसादी समझ के पिई ल ।
विन्देश्वर – (हात जोड़्दै) आज पियेको परी । बहुदिन के बाद दारु पियेको मौका मिलल् बा । (बोतल खोलेर गिलासमा खन्याएरपछि चियर्श गर्छन्) ।
सबै – ह्याप्पी कोरोनाडे । (अनि अलि भेटेपछि गीत र नाच शुरु हुन्छ)।
विन्देश्वर – लु ह्याप्पी कोरोना डे को खुशी में गीत गावेके परी । मस्ती करेके परी । झुम नाच गा व । (गीत गाउँछ । अरु नाँच्छन्)

काला काला बोतल वा में लाल लाल पानी
ठोठवा से चुस्की लिई मस्त होई जवानी ।

पतरकि दि के गिलासवा में थोरी और भर दे
ह्याप्पी कोरोना डे ह्याप्पी कोरोना डे ॥

जोगिन्दर – पतरिया कमरिया करेण्ट मारेला
जिगरिया में कैसन गुदगुदी मारेला ॥

पतरकी – (नाँच्दै) ओ….ओ…

जिगर कैसन भइल बाटेललका पानी वा से
बोल सब ह्याप्प् ह्याप्पी कोरोना डे ॥

सबै – ह्याप्पी ह्याप्पी कोरोना डे ।

ओ…ओ…दारुबाबा दारुमाता
याद रखि ह हमनी के
ह्याप्पी कोरोना डे ॥ (सबै चूर मात्छन् । दुवै रुन थाल्छन्)

विन्देश्वर – (जम्ले हात गर्दै) पतरकी दिदी एगो बात बोली तोहराके ।
पतरकी – एक बात काहे सौ बात बोल् सकेला । बो ल…बो ल….
विन्देश्वर – आज एक हजार के दारु आएल् बा इस घरवा में । लेकिन ये सब हमनी के मेहनत के पासे ले आएल् बा ।
जोगिन्दर – (रुँदै) पतरकी दिदी हम छाती पर हात रखकर के कहतनि जे ये दारु राहत सामग्री के नाम पर चन्दा असुल के नैखे आएल् बा । कोरोना माई और दारुबाबा के कसम खाकर के कहतनि हमनी के अपन् सुपथ पैसा से किनाइल् बा ।

बिन्देश्वर – पतरकीदि हमनी के गरिब बानी जा लेकिन मन के धनी बनी । रुखा सुखी रोटी खाकर घर में हतनि लेकिन धोब्लाबाजी करे के ताल में नैखे रहतनि ।

पतरकी – धूर पगले । राहत सामग्री के नाम पर के घोब्लाबाजी करेला हमनी के सब पता बा । अरे रौंवा तुम लोगन् इस सब में ना रहेला वो हम बनिया से जानतनि । (रूँदै) ऐसन बात अगर दोबारा करबे ना ति डुङ्ग्र लोगन के ऐसा झाँपट मारम् कि कनपट्टी लाल होइ । यी सब तोरा मेहनतके पैसा से आइल् बा । (पतरकी कोहोलो मच्चेर रुन थाल्छे। दुवै सम्हाल्नतिर लाग्छन्) ।

पर्दा खस्छ ।

०००
सिलगडी (भारत)

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