कृष्ण प्रधानटोयलेट मोड- ४
अचानक यो धमरधुसेलाई के भयो हो बले काका? बले - (बन्दुक ताकेक देखेर) अब यो कालेले हामीलाई ठहरै पारेर खैराते शहीद बनाउँछ होला हौ। म अब दाउ हेरेर टाप लाउँछु है...

कृष्ण प्रधान :
पात्रहरू – टोयलेटबाबु, बले, सीआरपीएफ, वकी टकी (नेपथ्य स्वर) ।
भाग ३ को अन्ति अंश-
सीआरपीएफ – बाँस में कपडा?
बले – ह्याँ….कपडा बेरता है…
हहहह … हहहहह… हहहह…
सीआरपीएफ – कैसा कपडा ?
टोयलेटबाबु – कस्तो भन्नु यो तोरमेलाई। अब फाटेको कपडा, च्यातिएको होता है न… उसको डल्लो पारके….
सीआरपीएफ – कपडा और मिट्टीतेल का सर्वनाश ।
बले – मत बोलिये साप मत बोलिये । यहाँ ता बोलि नसक्नु है। थाङ्ना तो ठिक है लेकिन हप्ताभरि पाएका राशिन का मट्टितेल तो सखाप नि। अचानुको पीर खुकुरी नै जानता है । ये पूल्ठो जुलूस में जाने के लिये इतना कपडा स्वाहा हो गया कि भनेर साध्य नही है ।
सीआरपीएफ – (कुरा बुझेजस्तो गरी मुण्टो हल्लाउँदै) हँ…..
टोयलेटबाबु – साप एक दिन क्या हुआ… मेरा वाइफ है ना उसको दो नयाँ पेटिकोट धोकर तार में सुकाया था । रात को तार ने निचे गिर गया था… पुराना ठानकर उसी से पूल्ठो बनाकर मट्टीतेल मे चोबा । जुलूस जाने का समय में वाइफ ने अपना पेटिकोट धुइपताल लाकर खोजा तो मैंने पूल्ठो बनाया बोला ना ओ तो रिस से हुप्प फुलकर घर में रँडाको मच्चाया । उस दिन जुलूस में बिना पेटिकोट पहन के उसको पूल्ठो जुलूस में जाना पडा…
बले – नयाँ जुत्ता जो लगाता है न साप…नयाँ नयाँ में जुत्ता से औंली कितना चेपता है… जुत्ता लगानेवाला को हि मालुम होता है ना । (सीआरपीएफ मुण्टो मात्रै हल्लाउँछ) ।
टोयलेटबाबु – साप अभी तो हमलोग का इधर कुनै पनि लुगा बाहर सुखाना इतना डरसरि हुनुपरता है … पूल्ठो के लिये एक मिलिक मै स्वीत्तै पार देता है ।
सीआरपीएफ – लेकिन जो भी बोलो । तुम लोगों का पहाड का औरत लोग बहुत सुन्दर होता है यार ।
टोयलेटबाबु – आपको मन परता है हाम्रा पहाड का चेलीबेटीहरू ?-
सीआरपीएफ – (भुतुक्कै मस्केर) ये भी कहने का बात है ?
बले – आम्बो…यो धरधुसेलाई हाम्रो पहाडमा सरकारले ड्यूटीमा पठाको कि जुलूसमा हिँड्ने हाम्रा चेलीबेटीहरूलाई हेर्न पठाको हँ !
सीआरपीएफ – (शङ्कालु भावमा) तुम लोग जुलूस में भी जाते हो न ?
टोयलेटबाबु – नै जाने से तो हम लोग का छाला काढ़ेगा बोलता है नेता का आदमी लोग साप।
बले – नै तो रातभर छप्पर में पत्थर हानकर सुत्ने नै देता है साप।
सीआरपीएफ – (बलेको पानी पेटमा बन्दुकले घोंच्दै) …ओ ….(बले कुतकुती लागेर भुतुक्कै भई हाँस्छ) श्श्शाला… हँसते हो…क्यो हँसते हो शाला…
बले – आप ने बन्दुक से हमारा पानी पेट छुआ न… हम को कितना कुतकुती लगा साप । कोई भी हमारा पानी पेट में छुने से ना हम हँसके भुतुक्कै होता है ।
टोयलेटबाबु – हाँ साप । ये इसका पानी पेट में छुनै नै देता है । लेकिन इसका आगो पेट में ना जितना कुतकुती लगाइये यो पत्थर जैसा मत्थर..
सीआरपीएफ – (कुरा काट्दै) शाले ! जुलूस में जाकर पत्थर भी फेंकता है न
सीआरपीएफ – के उपर?
बले – ना…ना…साप ना । हामी सिधा सादा सोलाना जुलूस में जाता है… कुनै उपद्रो नगरी सिधै घर फर्कता है
टोयलेटबाबु – आपका बन्दुक कसम । हामीहरू वैसा उपद्रो काम…
सीआरपीएफ – (कुरा काट्दै) उपद्रवी काम करते हो न शाले । (बलेतर्फ ठूल्ठूलो आँखा पारेर हेर्दै) जुलुस में नारा बोलता है तुम शाले ?
बले – नही साप…नही साप ।
टोयलेटबाबु – झूठ किन भन्न अहिले हमारा बले काका मच्ची मच्ची नारा भट्टता था ।
सीआरपीएफ – (बलेमाथि झम्टिँदै) नारा बोलता था तो…फिर क्यों नहीं नहीँ हाँ..हाँ…सुअर का बच्चा….
बले – (हतार हतार) साप मैं सुअर का बच्चा नहीं हूँ… मैं तो अननेरी क्यापटन हिम्मतसिंह का जेठा छोरा हुँ ।
सीआरपीएफ – तेरा बाप का नाम कौन पूछा है रे शाले । अच्छा (बलेलाई) प्रथम प्रथम जुलूस में नारा लगाया… फिर क्यों बन्द किया ?
बले – हमारा दाँत है ना साप… उपर का बालकोनीका दाँत फोल्डिङ् वाले है। एक दिन जुलूस में मच्चीमच्चीकर उफ्रीउफ्रीकर नारा भट्टा रहा था ना… टिष्टा रङ्गीत सुक्दैन…मात्रै बोला था ना, आम्बो उपर बाल्कोनी का फोल्डिङ दाँत फुत्तै उछिट्कर एक जना के टाउको पर लग गिया….
टोयलेटबाबु – विपक्षी पार्टी ने पत्थर मारा बोलके बहुत बडा हङ्गामा हुआ । कम्ति ता भागाभाग नहीं हुआ साप । भोलिपल्ट सुबह एकाबिहानै भुकभुके उज्यालो मे इसका दाँत खोज्नु हम दो भाइ निकल गिया…फोल्डिङ दाँत तो नहीं मिला साप…दाँत अडकाका तार मात्रै मिला…
बले – वो भी भागा र भाग में कुचलकर ऐसा कुइँक्कै बाङ्गा था कि कुकुर का पुच्छर से भी ज्यादा बाङ्गेका था ।
टोयलेटबाबु – उसी दिन से बले काका जुलूस में नारा भट्याने का काबु हो गया है…(बले – मस्किन्छ) ।
सीआरपीएफ – (रिसाएको भावमा बन्दुक उज्याउँदै) हल्ट। डण्ट मुभ । कोई नहीं हिल्लेगा…(दुवै तर्सिन्छन्)।
टोयलेटबाबु – अचानक यो धमरधुसेलाई के भयो हो बले काका ?
बले – (बन्दुक ताकेक देखेर) अब यो कालेले हामीलाई ठहरै पारेर खैराते शहीद बनाउँछ होला हौ। म अब दाउ हेरेर टाप लाउँछु है…
(क्रमशः)
०००
सिलिगुडी (भारत)
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