टङ्क कार्कीपुतली
कुसुलेकी पुतली
झिम्क्याउछे परेली |
नाची नाची गर्छे |
कम्मर भांची हेर्छे |
कुसुलेको ईसारा
हेरी नाच्छे मुजुरा |
नकच्चरी मोरी
सरम धरम छोडी
कुसुलेकी पुतली
झिम्क्याउछे परेली |
साँझ परे लुक्छे |
दिन भरि कुद्छे |
दाना पानी बटुल्छे
माना पाथी भर्छे |
कुसुलेकी पुतली
झिम्क्याउछे परेली |
नखरा \’नि गर्छे
ळुटुपुटु \’नि हुन्छे
स्वामी मोरो लोभी
भक्ति उसको हो नी |
कुसुलेकी पुतली
झिम्क्याउछे परेली |
काठमाडाैं
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