हेम अधिकारीघाँडोको खाँडो
रोग भोक अशिक्षाका उपहारोँसे नाराज जनता निसान बनाते हुए जङ चला हैँ । ए जङमेँ जङ्गबहादुरोँके मिले बडे बडे भाग भाग भाग, जनताके थाप्लामेँ खुँडा ठ्याक् ठ्याक् ठ्याक् ।

हेम अधिकारी :
हैँ श्री श्री श्री श्री श्री सर जङ्गबहादुरोँके फउज के फउजसे, देशके अउरसे जनताके समरमे चलते हैँ । सर जङ्गबहादुरोँके हुकुमके हुकुमसे, चलते हैँ । कभि कउन जङ्गबहादुर कभि कउन जङ्गबहादुर होते हैँ । पालो मिलाते हैँ । जउन होतेहुए भि जङ्गबहादुरके पल्टन चलते हैँ । तासागुर्जा रातमे लङ्गुरबुर्जा, नगरा निसान भेरी सब गर्जन लागे देश जनता थर्कन लागे फेरि दिशाविदिशामे देश जनता कम्प कराते कराते हुए चलते हैँ ।
कउन कउन डिभिजन होते हैँ ।बामबहादुर,खामबहादुर, काँगबहादुरके डिभिजनके पासमे चलते हैँ । कउन कउन कमाण्डर चलते हैँ । कालीबहादुर, बज्रबहादुर, फर्सबहादुर, हामबहादुर, खामबहादुर, घुसबहादुर, भकारीबहादुर, सहकारी बहादुर, सरकारी जग्गाबहादुर, बालुवाटारबहादुर, गरिबमारबहादुर, शरणार्थीबहादुर, हरणार्थीबहादुर, पासपोर्ट बहादुर, सिमानाबहादुर, विमानबहादुर, जनमतदुत्कारबहादुर, बलात्कारबहादुर, हत्याबहादुर, भत्ताबहादुर, सत्ताबहादुर, बाख्राबहादुर, साँप्राबहादुर, विदेशबहादुर, विशेषबहादुर, होलसेलबहादुर, खुद्राबहादुर एसे एसे बहुतसे नामनामेसीबमोजिमके कामकामेसीवाले कमाण्डर बहादुर चलते हैँ । सबका सब हुद्दा हवारी से चले सवारी हैँ । देशदुनियाँ थर्कन लागे थरर थरर थरर । निराशाका गोली वर्षन लागे बरर बरर बरर ।
कउन कउन केटी चलती हैँ । एन्जिज्ञ देवी, विशेषज्ञ देवी, ठुसदेवी, घुसदेवी, भुसदेवी, उसदेवी, यसदेवी, त्यसदेवी, अल्लनपरी, लल्लन परी, उल्लनपरी, साँच्चै परी, अलेलि परी, टिकट बेच परी, जे जे पर्छ त्यही त्यही परी, सरकारी जग्गा परी, भ्रष्टाचारी भगापरी, बुढाको अडमा मनपरी, जन नपरी, माथिबाट तानपरी, नेताका घर चक्करमार परी, अनि पारतर परी, धम्क्याइ परी, चम्काइ परी, थर्रकाइ परी, मर्रकाइ परी, हरकाइ परी एसी एसी नाना नामेसी केटी चलती हैँ । नाना अत्तर हर्कन लागे हरर हरर हरर जङ्गबहादुरोँके अशिना वर्षन लागे बरर बरर बरर ।
कउन कउन घोडा चलते हैँ । पजेरो, प्राडो, हेली, तरेलीका परेली, ल्यान्डक्रुजर विशिष्ट विशिष्ट देशी विदेशी घोडाके लर्कन चलते हैँ । देशके मुटु हिलाते हैँ जनता चिल्लाते हैँ । सवारोँ दिनमेँ थर्काते हैँ रातमेँ होटलोँमे कम्मर मर्काते हैँ ।
हैँ श्री श्री श्री श्री श्री श्री
कउन कउन तोप चलते हैँ । गाली तोप, ताली तोप, भ्रष्टाचारी छोप तोप, निरीहठोक तोप, हाँक तोप, जनता ढाँट तोप, कमाउ तोप, थपाउ तोप, उबारेर जमाउ तोप, नातिबुडाउ तोप, देश डुबाउ तोप, परिवार तोप, घरबार तोप, साइनो तोप, सम्धी तोप, सम्धिनी तोप, भाइभारदार तोप एसे एसे अनेकानेक तोप चलते हैँ । यीन तोपोँ ने पूरापूर नैपाल हर्काते हैँ हरर हरर हरर ।
सर जङ्ग बहादुरोँके सवारी होनेका बखत होतेहैँ । तामझाम सडक जाम जनजनका सातो खाम । बाजागाजा केटीका लर्कन, लावालस्कर चलते हैँ । जनताका नेता कहते हैँ । जनता भोक रोगले मरते हैँ जङ्गबहादुरोँ सवार चलाते हैँ । एसे महान जनताका मान्छे कहलाते हैँ ।
सिंहदरबार से अपने घरबार तक महान सवारी चलाते हैँ । ए समर जनता अउर देशके प्रति चलरहा हैँ । रोग भोक अशिक्षाका उपहारोँसे नाराज जनता निसान बनाते हुए जङ चला हैँ । ए जङमेँ जङ्गबहादुरोँके मिले बडे बडे भाग भाग भाग, जनताके थाप्लामेँ खुँडा ठ्याक् ठ्याक् ठ्याक् ।
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दमक, झापा
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