चट्याङ मास्टरशीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो !
(हिन्दी भाषामा)
शीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो,
शिर परस्त यह जनता देखो ।
बन्द करो अब कापी किताब,
फहराते हँसिया हथौड़ा देखो,
मलिन पड़े अब चाँद और सुरज,
जगमग जगमग तारे देखो ।
क्या सगरमाथा और क्या सुमेरु पर्वत ?
सुजा तिल, बना पहाड़ देखो,
ताला बन्द है सुनसान पाठशाला,
भिड सजे मधुशाला देखो ।
शीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो,
शिर परस्त यह जनता देखो ।
क्या झाँकना अब मंदिर मस्जिद में ?
भाषण देता नेता देखो,
बने शेर सब भिगी बिल्ली,
बिल्ली करे अब दहाड़ देखो ।
क्या मिला हमे शांति और अहिंसा से ?
क्रान्ति से मिले कितने शहीद देखो ।
बुद्ध गाँधी की उतार के तस्वीर,
सजाए तस्वीर फिरंगी देखो ।
शीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो,
त्रस्त जनके भ्रष्ट नेता देखो ।
“तमसोमा ज्योतिर्गमय”
ऐसा पश्चगमन ना करो ।
“ज्योतिर्मा तससोगमय”
ऐसा अग्रगमन देखो ।
क्यों रहें हम सब मिलजुल के ?
हरेक के पास है गोला बारुद देखो ।
नेता व्यस्त है जनसेवा में,
जिंदों पर चढ़ाते कफन देखो ।
शीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो,
शिर परस्त यह जनता देखो ।
माँ की आँचल छोटी पड़ी हमे ,
नेता की फैली लंगौटी देखो ।
हे भगवान तेरा शरण किसकाम अब ?,
मिल गया नेता के चरण देखो ।
जैसी जनता वैसा नेता
लिंग विभेद ये जरा गौर से देखो ।
जैसा नेता वैसी जनता,
अपनी सकल अब नेता में देखो ।
शीर्षस्थ की नयी परिभाषा देखो,
शिर परस्त यह जनता देखो,
अनिष्ट का जो बड़ा घनिष्ट,
बना वही शीर्षस्थ देखो ।
२६ जुलाई, २०१३
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