साइबर अपराध सम्बन्धी सचेतना सामग्री

टोयलेट मोड़- ३

जाने परता है साप । घर लौरी जरुरी है । न जाने से नेता लोग इतना टर्चर करता है साप । सीआरपीएफ- जुलूस दिन को होता है कि रातको ?

Nepal Telecom ad

कृष्ण प्रधान :

पात्रहरू – टोयलेटबाबु, बले, सीआरपीएफ, वकी टकी (नेपथ्य स्वर) ।

पहिलो अङ्क

पहिलो दृश्य भाग २ को अन्तिम अंश….

सीआरपीएफ- (रिसाएर) चूप स्स्साला…कुत्ते का बच्चा। ज्यादा बोलता है स्स्साला । (बन्दुक उज्याउँदै) और बकबक करेगा तो स्स्साला इसी से उड़ा दुँगा । (टोयलेटबाबु भन्दा पनि बन्दुक उज्याएको देखेर बले डरले थुरथुर हुन्छ ।)

त्यसपछि….

बले- नै बोलेगा साप नै बोलेगा…ये ज्यान का बहुत माया लगता है। आई लभ माई ज्यान ।
टोयलेटबाबु- थुक्कु साप थुक्कु….
सीआरपीएफ- मैने तो आर्म्स (बलेको पाखुऱा देखाउँदै) का बात नही किया….आर्म्स यानिकि बुलेट, ग्रिनेड, बम, बन्दुक, पिस्तोल का बात किया है । अच्छा तुम लोग कहाँ रहते हो ?
बले- (हतार-हतार टोयलेटबाबुलाई देखाउँदै) ये बम बस्ती में और म नि तोपखाना में ।
सीआरपीएफ- स्स्साले एक बम बनाता है और दूसरा तोप बनाता है ?
टोयलेटबाबु- ना…ना…ना…साप होइन है…हम लोग नै कहिल्यै पनि वैसा हतियार नहीँ चलाया है…न बनाया है । न देखा है न कभी छुआ नै है । बनाने का तो कल्पना भी नहीं किया है ।

बले- ह्याँ साप सिर्फ गुलेली बनाया है ।
सीआरपीएफ- (छक्क परेर) गुलेली ??? ये कौन सा आर्म्स है ?
टोयलेटबाबु- गुलेली यानि कि क्याटिबवल…क्याटिस् ।
सीआरपीएफ- (झन् छक्क परेर) हँ…अच्छा…कार्तुस बनाता है न…किस से बनता है ये ?
टोयलेटबाबु- रुख का हाँगा काट्के ।
सीआरपीएफ- देख्ने में कैसा होता है ?
बले- (क्याटिस आकारको वृतान्त बताउँदै) अम्बक का रुख का हाँगा (दाहिने हातको बूढ़ो औंली र चोर औंलीलाई ’थ्’ आकारको बनाउँदै) से क्याटिस बनता है । इसका दुवै साइड में लाबर लगाना परता है ।
टोयलेटबाबु- और त्यसमा मटेङ्ग्रा चेपकर वा मेस्कोल चेपकर और तनक्कै (क्याटिस तन्काएको अभिनय गर्दै) तन्काउनुलाई के भन्छ…तनक्कै करके….
सीआरपीएफ- (बलेलाई) तुम बोलो….
बले- (हतार-हतार क्याटिस तन्काएको अभिनय गर्दै) इस को तनकाके हानना परता है ।
सीआरपीएफ- (नबुझेको भावमा) हँ….????
टोयलेटबाबु- खिच के (अभिनय गरी) हान ना परता है…जिसका लगेगा न वो ठहरै होगा ।
बले- (हतार हतार) तर नि साप…बाईचान्स हात मिस होकर रिटर्न आने से हान्ने मान्छे फेरि ठहरै ।
टोयलेटबाबु- अम्मुइ…सर क्या हुरुक्कै होता है नि दुःखेर…
सीआरपीएफ- ये ठहरै क्या होता है ?
बले- खुत्रुक्कै नि साप। ृक्याटिस आफ्नो हातमा लिएर वर्काइ फर्काइ हेर्छ। क्याटिस ताकेर हान्ने हुँदा हात फुस्केर आफ्नै मुखमा लाग्छ। सीआरपीएफ दुःखेर हुरुक्कै मात्र होइन ठहरै हुन्छौ ।
टोयलेटबाबु- साप ! दुखा आपको ? कितना दुख्ता है न साप !…
बले- साप ! क्याटिस हानते बखत सिज तो करना परता है न ।

सीआरपीएफ- (क्याटिस हेर्दै) ऐसा कारतुस तो हम लोगों ने बहुत सिज किया है । (मुण्टो हल्लाउँदै) अच्छा ये किस काम में आता है ?
टोयलेटबाबु- बारी में चराचुरुङ्गी, बाँदर, बनेल, भालू, मृग, मूसा आकर दिक देता है तो इसी क्याटिस से मारता है ।
बले – फारस में जाकर चरा को क्याटिस से मारता है…. मटेङ्ग्रा वा छर्रा से लागेर फिलिलि भूइँ में झरता है टिपकर और भुत्लाकर पोलके खाता है ।

सीआरपीएफ- छोड़ो ये सब फजुल के बातेँ । अच्छा तुम लोग जुलूस में भी जाते हो ?
टोयलेटबाबु- जाने परता है साप । घर लौरी जरुरी है । न जाने से नेता लोग इतना टर्चर करता है साप ।
सीआरपीएफ- जुलूस दिन को होता है कि रातको ?
बले- रातको नि ।
सीआरपीएफ- क्यो ?
टोयलेटबाबु- रातको राँके जूलूस ।
बले- (हतार हतार) पूल्ठो जुलूस भी बोलता है साप ।
सीआरपीएफ- क्या है फिर पूल्ठा जुलूस ?
बले- एक ठो लम्बा बाँस का कप्टेरो में भक्कु थाङ्ना बाँधकर उस में मट्टीतेल चोबकर माचिस से बालना परता है ।
टोयलेटबाबु- यही लेकर हम लोग पूल्ठो जुलूस वा राँके जुलूस में जाता है ।
सीआरपीएफ- बाँस में कपड़ा ?
बले- ह्याँ….कपड़ा बेरता है… ।

(क्रमशः)

०००
सिलिगुड़ी (भारत)

Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Nepal Telecom ad
नबोल्ने वरदान

नबोल्ने वरदान

कृष्ण प्रधान
खोचे थाप्नु

खोचे थाप्नु

कृष्ण प्रधान
…छँदैछु नि !

…छँदैछु नि !

कृष्ण प्रधान
माथि…

माथि…

कृष्ण प्रधान
नयाँ फास्ट फुड

नयाँ फास्ट फुड

कृष्ण प्रधान
छुचो हुँदै छु

छुचो हुँदै छु

शेषराज भट्टराई
धर्म

धर्म

मनाेहर पाेखरेल
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x