रमेश खकुरेलत के भो ?
कहाँको कुरा ली कहाँसम्म हाँक्यौ हँसायौ सबै मूर्खता भित्र ढाक्यौ चिरा तीन पारी लँगौटी फटायौ त के भो त के भो त के भो त के भो।।

रमेश खकुरेल :
तिमी को कहाँबाट यो ठाउँ आयौ
कहाँ के बिरायौ कहाँ के समायौ
अझै माथि जान्छौ झनै माथि जान्छौ
त के भो त के भो त के भो त के भो।।१
तिमीले बनायौ त पैसै बनायौ
सबै स्वार्थ छोडी भलो के बनायौ
सडी मात्र दुर्गन्ध छर्दै गह्नायौ
त के भो त के भो त के भो त के भो।।२
उठायौ त चम्चाहरू नै उठायौ
कि तिम्रै बडा सौधमाला ठड्यायौ
कतै माल खाएर मान्छे उडायौ
त के भो त के भो त के भो त के भो।।३
कहाँको कुरा ली कहाँसम्म हाँक्यौ
हँसायौ सबै मूर्खता भित्र ढाक्यौ
चिरा तीन पारी लँगौटी फटायौ
त के भो त के भो त के भो त के भो।।४
तिमी भन्दछौ क्या गरेँ जिन्दगीमा
खसालेँ अरू मै खसी गन्दगीमा
कुनै भन्छ ता सुन्छु चाहिन्न सीमा
त के भो त के भो त के भो त के भो।।५
०००
कमलपाेखरी, काठमाडाैं
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