सुरेशकुमार भट्टजे भने नि अच्छा
लास्ट ईएर मेरा पापा एक्सीडेन्टमे गिया। अच्छा। हम भि अकेला है भाइ । अच्छा। अरे व यार तुम तो मेरा दिग्गजका बातको अच्छा मान्ते क्या ? नाही नाहीं ए मेरा भि मुलाकात के आदत है ।

सुरेशकुमार भट्ट :
दुई जना साथीहरू धेरै वर्षपछि अचानक ट्रेन स्टेसनमा भेट भए । राम स्वरूपले कृष्णभक्तलाई सोध्यो- खुश खबरी क्या है ? कुछ नही भाइ। अच्छा। सब बरबादका बात है । अच्छा। मेरा दो साल आगे पिताजी गुजरगए। अच्छा। उसका दो महिना पिछे मेरी माताजी भि गुजर्गई। अच्छा। बेटा स्कुलबाटै किडन्याप हो गए । अच्छा।
फिर बेटीका मगनीवाला एक पाइलट थे व प्लेन एक्सीडेन्टमे मरगए। अच्छा। मेरा साथ छोडकर मेरी बिबी भि दुसराको साथ चलिगई । अच्छा। हम तो अकेला पडगए भाइ अब क्या करूँ ? बोलुना। अच्छा तो बोलिरहा हुँ। तुम तो मेरा बरबादीको भी अच्छा मान्ता है क्या ? ना ना व तो अच्छा नही। लेकिन मेरा यही आदत है। अच्चा अच्छा कहने का। तुमको कैशा है किशा ? कृष्ण भक्त ने कहा । उसकी तरह रामस्वरूप ने ही बोला अच्छा। मेरा भि बिबी दो साल पहले गुजर गई। अच्छा। तीन साल पहले मेरा जहाज सागरमे फसगई। अच्छा। मेरा सारा प्रपर्टी डुब गए । अच्छा।
लास्ट ईएर मेरा पापा एक्सीडेन्टमे गिया। अच्छा। हम भि अकेला है भाइ । अच्छा। अरे व यार तुम तो मेरा दिग्गजका बातको अच्छा मान्ते क्या ? नाही नाहीं ए मेरा भि मुलाकात के आदत है ।
ईसलिए तुहारा सारे दिग्गजमे मैने अच्छा बोला क्यू कि तुम्ने जो किया मै ने भि वही किया दोस्त ए हुईना अच्छा। बात। दोनो हि अकेला बन गया तो य भि अच्छा। अकेला कि साथ अकेला मिले ए भी कहो अच्छा। दोनो बोले हमारा भाषाका ए असली रूप है अच्छा। अच्छा कहनेका चाहे दुख हो या सुख ।
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